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Friday, 1 May 2020

इजरायल में सरकार की नाकामी के खिलाफ प्रदर्शन; तुर्की में वेतन की मांग कर उग्र कामगार सड़कों पर उतरे

तस्वीर इजरायल के तेल अवीव शहर की है। लॉकडाउन के दौरान हजारों कलाकारों और छोटे कारोबारियों ने सरकार के खिलाफ सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए प्रदर्शन किया। इन लोगों ने आरोप लगाया कि सरकार कोराेना संकट का मुकाबला ठीक से नहीं कर सकी है। बता दें कि इजरायल में अब तक कोरोनावायरस के 16 हजार से ज्यादामामले सामने आ चुके हैं। जबकि 223 लोगों की मौत हुई है।

सुविधाओं की मांग को लेकर उग्र कामगार सड़कपर उतरे

मजदूर दिवस पर तुर्की की राजधानी इस्तांबुल में हजारों कामगारों ने वेतन और सुविधाओं की मांग को लेकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। इस बीच, ट्रेड यूनियन के कुछ नेताओं की पुलिस से हिंसक झड़प हो गई। इसमें कुछ लोग घायल हो गए। सरकार ने लॉकडाउन के मद्देनजर रैलियों पर रोक लगाई है। इसके बावजूद लोग सड़कों पर उतरे। तुर्की में कोरोना के 1 लाख 20 हजार 204 मामले आए हैं। अब तक 3,174 मौतें हो चुकी हैं।

प्रदर्शन के दौरानट्रेड यूनियन के कुछ नेताओं की पुलिस से हिंसक झड़प भी हुई।


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इजरायल के तेल अवीव शहर में हजारों कलाकारों और छोटे कारोबारियों ने सरकार के खिलाफ सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए प्रदर्शन किया।


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बच्चा मास्क से डरे, ताे उसे मजेदार चित्राें वाले मास्क दें, इससे जुड़ी क्राफ्ट एक्टिविटी करवाएं, उसके खेल में भी मास्क को शामिल करें

(पेरी क्लास, एम.डी).काेराेना संक्रमण के दाैर में एक महीने में लाेगाें की जीवनशैली में शामिल हुए मास्क काे वयस्काें ने ताे अपना लिया है, लेकिन बच्चाें के लिए यह किसी खाैफ से कम नहीं है। कई बच्चाें काे यह डरा सकता है। मुखाैटाें से डरने वाले बच्चे मास्क काे लेकर ऐसी हीप्रतिक्रिया कर सकते हैं। ऐसे में बड़ा संकट है बच्चों को मास्क से परिचित करवाना।हार्वर्ड मेडिकल स्कूल में साइकाेलाॅजी के लेक्चरर राेबर्टाे ओलिवर्डिया कहते हैं, ‘करीब एक प्रतिशत बच्चे मास्काफाेबिया से पीड़ित हाे सकते हैं। यह ऐसा डर है, जाे बच्चाें में छह महीने तक रह सकता है। यह काॅस्ट्यूम औरसुपरहीराे से भी जुड़ा हाे सकता है।’

हालांकि, कई बच्चे अपने माता-पिता काे मास्क पहने देखकर डर सकते हैं।

छाेटे बच्चाें में चेहरा पहचानने की शक्ति कम हाेती है- प्रो. कांग ली
बच्चाें के चेहरा पहचानने के काैशल के विकास का अध्ययन करने वाले टाेरंटाे यूनिवर्सिटी के प्राे. कांग ली के मुताबिक, मास्क से डरने का एक कारण चेहरा न पहचान पाना हाे सकता है। छाेटे बच्चाें में चेहरा पहचानने की शक्ति कम हाेती है। छह वर्ष की उम्र से बच्चाें में यह काैशल विकसित हाेता है। 14 वर्ष की उम्र तक वे वयस्काें जैसे काैशल तक पहुंच पाते हैं। छह वर्ष से कम उम्र के बच्चे किसी व्यक्ति के पूरे चेहरे काे पहचानने की बजाय चेहरे की किसी विशेषता से याद रखते हैं। जैसे नाक के आकार, आंख के प्रकार आदि।

बच्चों के सामने मास्क उतारें और लगाएं- डायरेक्टर मोंडलोक
ओंटेरियाे स्थित ब्राेक यूनिवर्सिटी में फेस परसेप्शन लैब की डायरेक्टर कैथरीन जे. माेंडलाेक के मुताबिक, बच्चाें के सामने बार-बार मास्क उतारें और लगाएं, ताकि वे पहचान सकें कि आप उनके माता-पिता हैं।

डॉ. विलार्ड ने कहा- फोबिया के इलाज के लिए एक्सपोजर थेरेपी बेहतर

कैंब्रिज में साइकाेथेरेपिस्ट डाॅ. क्रिस्टाेफर विलार्ड कहते हैं, ‘फाेबिया के इलाज के लिए एक्सपाेजर थेरेपी बेहतर है। परिजन मास्क से पहचान कराने का अनाैपचारिक तरीका अपना सकते हैं। मजेदार चित्राें वाले मास्क उन्हें दें। उन्हें अपना मास्क डिजाइन करने दें। इससे जुड़ी क्राफ्ट एक्टिविटी भी करवा सकते हैं। उन्हें मास्क पहनने और उतारने का अभ्यास कराएं। घर में घूमते-खेलते समय भी उन्हें मास्क पहनाएं। मास्क पहने हुए आंखोंके इशाराें से उन्हें समझाएं और उन्हें भी उसी तरह संवाद करने के लिए कहें।’

डॉ. कोपलिवक्ज के मुताबिक,बच्चों को समझा सकते हैं कि डॉक्टर और नर्स हीरोहैं

चाइल्ड माइंड इंस्टीट्यूट के प्रेसिडेंट डाॅ. हाराेल्ड काेपलिवक्ज कहते हैं, ‘सुपरहीराे से संबंध जाेड़ने से भी मदद मिल सकती है। उन्हें समझा सकते हैं कि डाॅक्टर और नर्स हीराे हैं, जाे लाेगाें की सुरक्षा करते हैं और मदद करते हैं। हम भी सुपरहीराे बन सकते हैं और मास्क पहनकर दूसराें की रक्षा कर सकते हैं।’



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फेस परसेप्शन लैब की डायरेक्टर कैथरीन जे. माेंडलाेक के मुताबिक, बच्चाें के सामने बार-बार मास्क उतारें और लगाएं, ताकि वे पहचान सकें कि आप उनके माता-पिता हैं।


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कोरोना के दौर में रोबोट टीचर्स, वर्क फ्रॉम होम, डिस्टेंस लर्निंग जैसे ट्रेंड बने जिंदगी का अहम हिस्सा

कोरोना संकट के दौरान लॉकडाउन, क्वारैंटाइन या आइसोलेशन के समय में समाज को गतिशील रखने में रखने में टेक्नोलॉजी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के मुताबिक, कोरोना महामारी ने प्रमुख टेक्नोलॉजी ट्रेंड्स को रफ्तार दे दी है। इनमें डिजिटल पेमेंट, टेलीहेल्थ और रोबोटिक्स भी शामिल हैं।कारोबार खुले रहने के बावजूद ये टेक्नोलॉजी संक्रमण को फैलने से रोकने में काम आ रही हैं। ये अन्य खतरों से निपटने के लिए समाज को लचीला बनाने में मदद भी कर रही हैं।

इन 8 प्रमुख ट्रेंड्स से जानिए कि कोरोनावायरस और लॉकडाउन से कैसे हर क्षेत्र में कैसे हो रहा है बदलाव

1 ऑनलाइन शॉपिंग और रोबोट डिलीवरी: 2002 में सार्स ने चीन में ऑनलाइन मार्केटप्लेस में जबरदस्त इजाफा किया। कोरोना ने इसे अगले स्तर पर पहुंचाया है।
2 डिजिटल पेमेंट: करेंसी से वायरस फैलने की संभावना है, इसलिए कार्ड या ई-वॉलेट से कॉन्टैक्टलेस पेमेंट बढ़ा है।
3 क्लाउड टेक्नोलॉजी, वीपीएन: वर्क फ्रॉम होम का चलन बढ़ा है। इसमें वीपीएन, इंटरनेट प्रोटोकॉल, वर्चुअल मीटिंग्स, क्लाउड टेक्नोलॉजी बढ़ी है।
4 डिस्टेंस लर्निंग, एआई वाले रोबोट टीचर्स: स्कूल, कॉलेज बंद होने से 191 देशों में करीब 157 करोड़ छात्र घरों में बंद हैं। ऐसे में ऑनलाइन पढ़ाई बढ़ी है। वर्चुअल रियलिटी, एआई टीचर्स का चलन बढ़ा है।
5 टेलीहेल्थ: टेलीहेल्थ संक्रमण नियंत्रित करने का प्रभावी तरीका है। वियरेबल डिवाइस और चैटबोट्स मरीजों के लक्षणों के आधार पर शुरुआती निदान कर रहे हैं।
6एंटरटेनमेंट: फिल्में ऑनलाइन रिलीज हो रही हैं। म्यूजियम वर्चुअल टूर करवा रहे हैं। ऑनलाइन गेमिंग भी बढ़ी।
7 सप्लाई चेन: कोरोना ने सबसे ज्यादा असर ग्लोबल सप्लाई चेन पर डाला है। ऐसे में बिग डाटा, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, ब्लॉकचेन जैसी टेक्नोलॉजी सप्लाई चेन मैनेजमेंट सिस्टम में मदद कर रही हैं।
8 3डी प्रिंटिग: सुरक्षा उपकरणों की आपूर्ति पर रोक के झटके को 3डी प्रिंटिंग ने कम किया है। एक ही प्रिंटर कई डिजाइन फाइलों और सामग्रियों के आधार पर विभिन्न उत्पादों को बना सकता है।



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191 देशों में करीब 157 करोड़ छात्र घरों में बंद हैं। ऐसे में ऑनलाइन पढ़ाई बढ़ी है। वर्चुअल रियलिटी, एआई टीचर्स का चलन बढ़ा है। -प्रतीकात्मक फोटो


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कोरोना संक्रमण के 5 से 10 दिन बेहद चिंताजनक, सतर्कता जरूरीः डॉक्टर

(तारा पार्कर-पोप).जब मेरे एक रिश्तेदार हाल ही में गंभीर रूप से बीमार हुए, तो कोरोना संक्रमण लग रहा था। मेरा पहला सवाल समय के बारे में था कि आपको कितने दिन पहले लक्षण दिखने शुरू हुए थे? बीमारी के पहले संकेत पर रोज का कैलेंडर बनाना संक्रमण की निगरानी के महत्वपूर्ण कदम हैं। जैसे- कब क्या हुआ, बुखार और ऑक्सीजन के स्तर को ट्रैक करना आदि।

अल्बर्टा यूनिवर्सिटी में संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ. इलाना श्वार्ट्ज कहते हैं,“ज्यादातर लोग एक हफ्ते में ठीक हो जाते हैं, लेकिन कुछ लोग बीमारी की “एक बहुत बुरी दूसरी लहर” में प्रवेश कर जाते हैं। हालांकि, हर मरीज अलग होता है, लेकिन संक्रमण के 5 से 10 दिन सांसों की जटिलता के लिए सबसे चिंताजनक समय होता है।” डॉ. श्वार्ट्ज के मुताबिक, ब्लड प्रेशर, डाइबिटीज और मोटापे से जूझ रहे लोगों की स्थिति 10 से 12 दिन में मुश्किल हो सकती है।

मॉनिटरिंग से बेहतर इलाज में मिलेगी मदद

1-3 दिनःकोरोना के शुरुआती लक्षण भिन्न होते हैं। यह गले में खुजली, खांसी, बुखार, सिरदर्द और छाती में दबाव से शुरू हो सकता है। कभी-कभी यह लूज मोशन से शुरू होता है। कुछ लोग थकान महसूस करते हैं और स्वाद और गंध पहचान नहीं पाते।

4-6 दिनःकभी-कभी बुखार, दर्द, ठंड लगना, खांसी और बेचैनी जैसे लक्षण दिखने लगते हैं। कुछ बच्चों और युवाओं के शरीर पर चकते पड़ सकते हैं। हाथ-पैर की उंगलियों पर खुजलीदार लाल धब्बे, सूजन या छाले हो सकते हैं।

7-8 दिनःसीडीसी के मुताबिक, जिन रोगियों के लक्षणों में सुधार है और 3 दिनों से बुखार नहीं है, वे आइसोलेशन से बाहर आ सकते हैं। कुछ की स्थिति बनी रह सकती है। ऑक्सीजन के स्तर की निगरानी करनी चाहिए। अस्वस्थ महसूस करने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।

8-12 दिनःइस दौरान मरीज को पेट के बल या करवट पर लेटने से बेहतर नींद महसूस हो सकती है। माउंट सिनाई के डॉ. चार्ल्स पॉवेल कहते हैं,‘8-12 दिन में पता चल जाता है कि मरीज की स्थिति बेहतर है या बिगड़ने वाली है। ऑक्सीजन का स्तर महत्वपूर्ण है।’

13-14 दिनःहल्की बीमारी वाले मरीजों को ठीक हो जाना चाहिए। जिनमें लक्षण बदतर थे, लेकिन ऑक्सीजन का स्तर बनाए रखा, वे दो हफ्ते में ठीक होने चाहिए। हालांकि, जिन्हें कम ऑक्सीजन के कारण अतिरिक्त उपचार की आवश्यकता हो, अभी भी अस्वस्थ और थके हुए महसूस कर रहे हो, तो उन्हें ठीक होने में अधिक समय लग सकता है।



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डॉक्टर के मुताबिक, हर मरीज अलग होता है, लेकिन संक्रमण के 5 से 10 दिन सांसों की जटिलता के लिए सबसे चिंताजनक समय होता है। -फाइल फोटो


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हांगकांग में 100% लोग मास्क पहन रहे; मास्क कम न हो, इसलिए जेल में कैदी भी हर महीने 25 लाख मास्क बना रहे

ऐलेन यू. विश्व स्वास्थ्य संगठन की गाइडलाइन में कोरोना से बचने का सबसे अच्छा विकल्प सोशल डिस्टेंसिंग, बार-बार हाथ धुलना और मास्क पहनना है। दुनिया में जब तक इन तीनों विकल्पों पर पूर्ण रूप से अमल किया जाता, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। इस सबके बीच चीन से लगे एक छोटे से देश हांगकांग ने लोगों की सुरक्षा के लिए सक्रियता दिखाई। रातोंरात स्कूल बंद कर दिए, शहर भर में पोस्टर लगा दिए कि हर दो घंटे में हाथ धोते रहें। घर से बाहर निकलने पर फेस मास्क जरूर लगाएं। लोग भी पीछे नहीं रहे। यहां पर मास्क पहनने का आंकड़ा 100 फीसदी दर्ज किया गया है। इसका नतीजा भी सबके सामने है। 75 लाख की आबादी वाले इस देश में कोरोना से सिर्फ 4 जाने गई हैं। 1038 संक्रमितों में से830 लोग स्वस्थ भी हो चुके हैं। देशवासियों को सर्जिकल मास्क की कमी न पड़े, इसके लिए यहां के जेल में बंद कैदी हर महीने 25 लाख मास्क बना रहे हैं। लेकिन, इस दौरान पश्चिम देशों में मास्क की जरूरत और उसकी क्षमता पर ही बहस होती रही और कई सप्ताह इसी में निकल गए।


17 साल पहले आए सार्स महामारी से हांगकांग के लोगोंने सीखासबक
हांगकांग के लोगों ने मास्क पर भरोसा इसलिए जताया, क्योंकि वे 17 साल पहले सार्स महामारी ने यहां कहर बरपाया था। इससे सबक लेते हुए यहां प्रशासन ने व्यापक स्तर पर मास्क बनाने का काम शुरू किया। हांगकांग के सर्वव्यापी मास्क के पीछे की कहानी भी काफी अनोखी है। दरअसल, हांगकांग में लाखों की संख्या में सर्जिकल मास्क यहां के कैदी बना रहे हैं, जिनमें से अनेक तो अतिरिक्त पैसों के लिए देर रात तक काम कर रहे हैं। चीन से लगने वाली सीमा पर मध्यम स्तर की सुरक्षा वाली लो वु जेल में फरवरी से 24 घंटे मास्क बनाने का काम चल रहा है। कैदियों के साथ-साथ रिटायर्ड कर्मचारी और काम से छूटने वाले अधिकारी भी मास्क बनाने में अपना योगदान दे रहे हैं। महामारी के हांगकांग पहुंचने से पहले यहां हर महीने 11 लाख मास्क तैयार किए जाते थे।


2018 में कैदियों द्वारा बनाए गए सामानों की कीमत 432 करोड़ रुपए थी

  • हांगकांग के कैदी जेल में अपना समय काम करते हुए बिताते हैं, जिससे न केवल उनके आलस और तनाव में कमी आती है, बल्कि काम से मिले पैसे से उन्हें अपने पुनर्वास में मदद मिलती है। यहां 4000 से अधिक कैदी हर साल ट्रैफिक चिह्न, पुलिस की वर्दी, अस्पताल कपड़े और सरकारी दफ्तरों में दी जाने वाली चीजें तैयार करते हैं।
  • 2018 में कैदियों द्वारा तैयार किए सामानों की कीमत 432 करोड़ रुपए आंकी गई थी। कैदी पूरी रात या अतिरिक्त शिफ्टों में यह काम स्वैच्छिक रूप से करते हैं। इसके लिए उन्हें ज्यादा मजदूरी दी जाती है। हालांकि दो साल की सजा पूरी कर पिछले ही महीने जेल से निकलीं यानीस कहती हैं कि उसे रोज की मजदूरी 4.30 डॉलर थी, जो हांगकांग में तय न्यूनतम मजदूरी का आठवां हिस्सा थी।
  • हांगकांग ह्यूमन राइट्स मॉनिटर के निर्देशक लॉ युक-काई कहते हैं कि समाज की अत्यावश्यक जरूरतों की पूर्ति के लिए इस तरह के सस्ते श्रम पर निर्भरता ठीक नहीं है। कैदी हमारी जरूरतों की पूर्ति के लिए इतनी मेहनत कर रहे हैं, तो उन्हें उनके काम का मामूली मेहनताना नहीं दिया जाना चाहिए।


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तस्वीर हांगकांग के लो वु जेल की है। यह चीन बॉर्डर पर स्थित है। इस मध्यम स्तर की सुरक्षा वाली जेल में बंद कैदी फरवरी से 24 घंटे मास्क बना रहे हैं।


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Thursday, 30 April 2020

गवर्नर के दफ्तर में बंदूकें लेकर पहुंचे प्रदर्शनकारी, रोकने के लिए पुलिस को मशक्कत करनी पड़ी; लॉकडाउन खत्म करने की मांग कर रहे थे

अमेरिका में लॉकडाउन के खिलाफ लोगों का विरोध तेज हो रहा है। मिशिगन की राजधानी लांसिंग में लोगों ने लॉकडाउन के खिलाफ गुरुवार को प्रदर्शन किया। यहां गर्वनर के दफ्तारकैपिटल बिल्डिंग परसैकड़ों लोग जुटे और नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों में से कुछ के पास से हथियार भी थे। ये गवर्नर ग्रेचेन व्हिटमर के लॉकडाउन के आदेश का विरोध कर रहे थे। गवर्नर ग्रेचेन ने यह आदेश 23 मार्च को कोरोना संक्रमण रोकने के लिए जारी किया था। इसमें लोगों के जरूरी कामों से इतर घरों से निकलने, सार्वजनिक समारोहों के आयोजन और स्थानीय अस्पतालों, मॉल या रेस्तरां जाने पर पाबंदी लगाई गई थी। बाद में आदेश को अप्रैल तक बढ़ा दिया गया था।

इस बीच, सोशल मीडिया पर प्रदर्शन के कुछ वीडियो भी पोस्ट किए गए हैं, जिनमें प्रदर्शनकारियों के पास हथियार नजर आ रहे हैं। ट्विटर पर पोस्ट की गई तस्वीरों और वीडियो में पुलिसकर्मी प्रदर्शनकारियों को बिल्डिंग में प्रवेश करने से रोकने की कोशिश करते दिखाई दे रहे हैं।

क्या है लोगों की नाराजगी की वजह?
गवर्नर ग्रेचेन ने संक्रमण के बढ़ते स्तर को देखते हुए इसे अप्रैल के अंत तक बढ़ा दिया गया। लोग इसी बात से नाराज हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि गर्वनर जरूरत से ज्यादा सख्ती कर रही हैं। प्रदर्शन मिशिगन यूनाइटेड फॉर लिबर्टी नामक एक ग्रुप की ओर से किया गया था। ग्रुप ने अपने फेसबुक पेज पर लिखा कि हम अपने अधिकारों पर पाबंदी या इसमें कटौती से सहमत नहीं है। चाहे यह कोरोना महामारी के लिए ही क्यों न लगाई गई हो। फेसबुक पर इस ग्रुप के 8 हजार 800 सदस्य हैं।
इस महीने मिशिगन में यह दूसरा प्रदर्शन
यह दूसरी बार है जब मिशिगन में पाबंदियों को हटाने के लिए प्रदर्शन किया गया है। 16 अप्रैल को भी करीब 3 हजार लोगों ने लॉकडाउन हटाने की मांग के साथ प्रदर्शन किया था। ऐसा बताया जा रहा है कि उस दौरान भी कुछ लोग हथियारों से लैस नजर आए थे। इसकी वजह से मिशिगन में यातायात प्रभावित हुआ था। इसके एक दिन बाद ही अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने प्रदर्शनकारियों को अपना समर्थन दिया था। उन्होंने ‘लिबरेट मिशिगन’ ट्वीट किया था। ट्रम्प कई बार देश में लॉकडाउन से छूट देने की बात कह चुके हैं। इससे लेकर ट्रम्प प्रशासन और कई राज्यों के गवर्नर के बीच सहमति नहीं बन रही है।



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यह तस्वीर अमेरिका के मिशिगन में गुरुवार को हुए प्रदर्शन में शामिल प्रदर्शनकारियों है। लोग लॉकडाउन हटाने के खिलाफ प्रदर्शन में हथियारों के साथ शामिल हुए।


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UP Board 2020: अगर सोशल मीडिया और इंटरनेट से है लगाव, तो 12वीं के बाद इन कोर्स में बना सकते हैं करियर

यूपी बोर्ड 2020: 12वीं पास होने के बाद कौन सा कोर्स करें इसको लेकर बहुत ही असमंजस की स्थिति होती है।

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