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1. नए साल के साथ ही आज हम नए दशक की दहलीज पर पहला कदम रख रहे हैं। बीता साल हमारे लिए कई दर्दनाक और परेशान करने वाली यादें देकर गया है। 2020 के अनुभव से हम क्या सीख सकते हैं, पढ़िए भास्कर थीम उम्मीदें 2021 में...
(2021 इस सदी के लिए उम्मीदों का सबसे बड़ा साल है। वजह- जिस कोरोना ने देश के एक करोड़ से ज्यादा लोगों को अपनी चपेट में लिया, उसी से बचाने वाली वैक्सीन से नए साल की शुरुआत होगी। इसलिए 2021 के माथे पर यह उम्मीदों का टीका है।)
2. साल 2021 कोरोना से लड़ाई का महत्वपूर्ण पड़ाव है। अनुमान है कि 30 करोड़ भारतीयों को जून तक वैक्सीन लग जाएगा। 160 करोड़ डोज बुक किए जा चुके हैं। पढ़िए, इससे जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य...
3. 2021 से देश को क्या-क्या उम्मीदें रहेंगी। आम आदमी के अधिकारों से लेकर अंतरिक्ष में हमारे परचम फहराने तक, देश नए साल में किन मील के पत्थरों को पार कर सकेगा? पढ़िए, इस रिपोर्ट में...
4. 2021 में दुनिया में क्या-क्या होगा। अमेरिका से हांगकांग तक कई बदलावों से दुनिया गुजरेगी। कई बड़े इवेंट्स होंगे। दुनिया के लिए क्या नया लेकर आ रहा है 2021 पढ़िए इस लेख में...
एक अप्रैल से वेतन के नए नियम, इन-हैंड सैलरी कम, पर बचत बढ़ेगी
एक अप्रैल से नए वेजेज रूल लागू होंगे। नियोक्ता कर्मचारी के कुल वेतन में भत्ते का हिस्सा 50% से ज्यादा नहीं कर पाएंगे। यानी कुल वेतन में बेसिक पे और एचआरए का हिस्सा 50% होगा। इस परिवर्तन से जहां कर्मचारियों के पीएफ में ज्यादा रकम जाएगी, वहीं यह कटौती बढ़ने से मासिक इन-हैंड सैलरी कम हो जाएगी।
परीक्षा में मार्किंग पैटर्न चेंज होगा, 4 बार होगी जेईई मेन
CBSE में 10वीं और 12वीं में अब 10% अंक केस स्टडीज से जुड़े होंगे। मार्किंग पैटर्न बदलेगा। प्रश्नों की संख्या भी कम होगी। साल में 4 बार जेईई मेन होगी। 2019 तक स्कूल और क्लासरूम पारंपरिक थे। 2020 में बच्चे ऑनलाइन लर्निंग से रू-ब-रू हुए। 2021 में दुनिया इन दोनों माध्यमों का मिला हुआ रूप यानी ब्लेंडेड लर्निंग देखेगी।
सबका डिजिटल हेल्थ कार्ड, मौसम विभाग देगा मलेरिया का पूर्वानुमान
हेल्थ कार्ड 2021 से पूरे देश में लागू किया जाएगा। यह कार्ड सभी अस्पताल और क्लीनिक से मिलेंगे। इस कार्ड में सभी रोगियों का डाटा सुरक्षित रहेगा। एक क्लिक पर इस रिपोर्ट को कभी भी और कहीं भी देखा जा सकेगा। इधर, मौसम विभाग मलेरिया, डेंगू जैसी वेक्टरबोर्न बीमारियों का पूर्वानुमान करेगा। इससे रोकथाम में आसानी होगी।
कृत्रिम किडनी आएगी, स्मार्टफोन कनेक्टेड पेस मेकर की भी तैयारी
अमेरिकी वैज्ञानिक आर्टिफिशियल (कृत्रिम) किडनी बनाने में सफलता हासिल कर चुके हैं। इसे किडनी के नीचे के हिस्से में लगाया जाएगा। एक सिरे में लगे पाइप को खून की धमनियों और दूसरे छोर को मूत्राशय से जोड़ा जाएगा। साल 2021 में स्मार्ट फोन कनेक्टेड पेसमेकर लाने की तैयारी है। इसमें मोबाइल फोन से पेसमेकर की मॉनिटरिंग की जा सकेगी।
हैपेटाइटिस-सी के नए इलाज को मंजूरी, एआर-वीआर से इलाज होगा
अमेरिका ने यूनिवर्सल हेपेटाइटिस सी के नए इलाज को मंजूदी दे दी है। नया इलाज पहले से चल रहे इलाज से 90% ज्यादा असरकारक है। साथ ही, घर बैठे इलाज के लिए वर्चुअल रियलिटी जैसे टूल्स 2021 में आ जाएंगे। जैसे आंखों के डॉक्टर वीआर के जरिए एचडी कैमरे से मरीज की आंख की स्पष्ट तस्वीर देख सकेंगे।
आ सकता है 5-G, लैंडलाइन से मोबाइल मिलाने पर 0 जरूरी
लैंडलाइन से किसी भी मोबाइल पर फोन लगाते हैं तो उसके लिए आपको नंबर से पहले 0 का इस्तेमाल करना होगा। 2021 में भारत में 5-G नेटवर्क की शुरुआत भी संभव है। वहीं, एंड्रॅाइड 4.0.3 ऑपरेटिंग सिस्टम से पुराने वर्जन पर वॉटस्ऐप नहीं चलेगा। यूपीआई से पेमेंट महंगा हो जाएगा। एनपीसीआई थर्ड पार्टी एप्स पर एक्सट्रा चार्ज लगाएगा।
चौपहिया पर फास्टैग अनिवार्य, चिप वाले पासपोर्ट भी जारी होंगे
सभी 4 पहिया वाहनों पर फास्टैग अनिवार्य होगा। बिना फास्टैग के टोल पर दोगुना चार्ज देना होगा। इलेक्ट्रॉनिक चिप वाले पासपोर्ट जारी होंगे। इसमें स्कैन करने से पासपोर्ट धारक की पूरी जानकारी स्क्रीन पर होगी। धोखाधड़ी रुकने के साथ ही चेक-इन में समय बचेगा। ई-पासपोर्ट की यह सुविधा अभी प्रायोगिक स्तर पर कुछ सेक्टर्स में दी गई है।
चेक पेमेंट पर पॉजिटिव पे लागू, कॉन्टैक्टलेस पेमेंट लिमिट बढ़ेगी
पॉजिटिव पे सिस्टम शुरू 2021 में शुरू होगा। 50 हजार से ज्यादा के चेक जारी करने पर बैंक को एसएमएस के जरिए सूचना देनी होगी। आरबीआई ने 1 जनवरी से कॉन्टैक्टलेस कार्ड पेमेंट्स की लिमिट्स 2,000 से बढ़ाकर 5,000 रुपए कर दी है। म्यूचल फंड कंपनियां रिस्कोमीटर जारी करेंगी। मल्टीकैप फंड में 75% राशि इक्विटी में लगेगी।
दैनिक भास्कर ग्रुप द्वारा ‘अपनी उम्मीदों का भारत’ थीम पर आयोजित अनूठी पेंटिंग प्रतियोगिता में देशभर से 7316 प्रविष्टियां प्राप्त हुईं। विजेता को दैनिक भास्कर के नव वर्ष के विशेष अंक के कवर पेज का हिस्सा बनने का मौका मिला है। 51 हजार रु. का पहला पुरस्कार जेनिल प्रकाशभाई डांगोदरा (सूरत)(पेंटिग, कवर इमेज में) , 31 हजार का दूसरा पुरस्कार स्नेहा साहनी (गोरखपुर) और 11 हजार का तृतीय पुरस्कार अद्रिजा सरकार (रांची) को मिला। ज्यूरी मेंबर्स के मुताबिक पेंटिग्स इतनी शानदार थीं कि विजेताओं का चुनाव करना मुश्किल था। ज्यूरी ने सांत्वना पुरस्कार में तय 10 प्रविष्टियों की बजाय 19 को चुना। सभी 19 को पुरस्कृत किया गया।
द्वितीय पुरस्कार विजेता - स्नेहा साहनी की पेंटिंगतृतीय पुरस्कार विजेता - अद्रिजा सरकार की पेंटिंगसांत्वना पुरस्कार विजेता - पार्थ किरणसिंह चौहान की पेंटिंगसांत्वना पुरस्कार विजेता - श्रुति पियुशभाई भदियाद्र की पेंटिंगसांत्वना पुरस्कार विजेता - नंदीनी कैलाश वंजरी की पेंटिंगसांत्वना पुरस्कार विजेता - यश पंकजभाई चौहान की पेंटिंगसांत्वना पुरस्कार विजेता - श्रेयक दुबे की पेंटिंगसांत्वना पुरस्कार विजेता - ममता किशोरभाई राठौर की पेंटिंगसांत्वना पुरस्कार विजेता - विवेक चिराग शाह की पेंटिंगसांत्वना पुरस्कार विजेता - तान्या तिवारी की पेंटिंगसांत्वना पुरस्कार विजेता - तन्वी पटेल की पेंटिंगसांत्वना पुरस्कार विजेता - तन्मय सोनी की पेंटिंगसांत्वना पुरस्कार विजेता - सुप्रिया सरयाम की पेंटिंगसांत्वना पुरस्कार विजेता - सुमित प्रजापत की पेंटिंगसांत्वना पुरस्कार विजेता - रोहनन ठाकुर की पेंटिंगसांत्वना पुरस्कार विजेता - पूर्वा रात्रे की पेंटिंगसांत्वना पुरस्कार विजेता - निष्ठा श्रीवास्तव की पेंटिंगसांत्वना पुरस्कार विजेता - डिम्पल राजपूत की पेंटिंगसांत्वना पुरस्कार विजेता - आस्था सिंह की पेंटिंगसांत्वना पुरस्कार विजेता - अभिषेक शर्मा की पेंटिंगसांत्वना पुरस्कार विजेता - आरती गुसाई की पेंटिंग
देश में कोरोना के मामलों में लगातार गिरावट देखी जा रही है। नवंबर के मुकाबले दिसंबर में करीब 4 लाख नए मामले कम सामने आए और मौतों में भी 5 हजार की गिरावट रिकॉर्ड की गई। नवंबर में देश में कुल 12.33 लाख मरीज मिले थे। 13.45 मरीज इससे पूरी तरह ठीक हो गए थे और करीब 15 हजार लोगों की जानें गईं थीं। इस दौरान 1.27 लाख एक्टिव केस (जिनका इलाज चल रहा) कम हुए।
वहीं, दिसंबर में संक्रमित पाए जाने वाले मरीजों का आंकड़ा 7.85 लाख रहा। इस दौरान 9.48 लाख लोग रिकवर हुए और करीब 10.8 हजार लोगों की जानें गईं। एक्टिव केस में 1.74 लाख की कमी दर्ज की गई।
ओवरऑल रिकवरी रेट की बात करें, तो इसमें भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है। अब ठीक होने वाले मरीजों का आंकड़ा 99 लाख के करीब पहुंच गया है। इस तरह देश का रिकवरी रेट अब 96.1% हो गया है।
कोलकाता के एक पार्क के बाहर लोगों को संक्रमण के प्रति जागरूक करने के लिए कोरोना का मॉडल लगाया गया है। न्यू इयर सेलिब्रेशन को देखते हुए सरकार और प्रशासन ने लोगों से ज्यादा सतर्क रहने की अपील की है।
देश में अब तक 1.02 करोड़ मामले
पिछले 24 घंटे में देश में 19 हजार 45 लोग कोरोना संक्रमित पाए गए। 22 हजार 23 लोग ठीक हो गए और 244 की मौत हो गई। ये आंकड़े covid19india.org से लिए गए हैं। देश में अब तक 1.02 करोड़ लोग संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं। इनमें 2.52 लाख मरीजों का इलाज चल रहा है, जबकि 98.81 लाख लोग ठीक हो चुके हैं। संक्रमण से जान गंवाने वालों की संख्या अब 1.49 लाख हो गई है।
कोरोना अपडेट्स
केंद्र सरकार ने अब पूरे देश में कोरोना के वैक्सीनेशन का ड्राई रन कराने का फैसला लिया है। 2 जनवरी को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के एक साथ ड्राई रन कराया जाएगा। इसके लिए राजधानियों में 3 पॉइंट तय किए जाएंगे।
राज्यों को यह छूट रहेगी कि वे इस प्रोसेस में दूरदराज के उन जिलों को शामिल कर सकते हैं, जहां वैक्सीन पहुंचाने में मुश्किल आ सकती है। बीते 28 और 29 दिसंबर को पंजाब, असम, आंध्र प्रदेश और गुजरात के दो-दो जिलों में वैक्सीनेशन के लिए मशीनरी की तैयारी को परखा गया था।
इस बीच ड्रग कंट्रोलर जनरल (DCGI) ने संकेत दिए कि अगले साल की शुरुआत में वैक्सीन उपलब्ध होगी। उन्होंने एक वेबिनार में कहा कि वैक्सीन कैंडिडेट को फंड मिल रहे हैं और बायोटेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट भी प्रयास कर रहा है। संभवत: नया साल काफी हैप्पी होगा, क्योंकि हमारे पास कुछ होगा। अभी मैं यही इशारा कर सकता हूं।
राजधानी दिल्ली में तेजी से घट रहे कोरोना मरीजों को देखते हुए राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। राजधानी में कोविड-19 मरीजों के लिए 7 सरकारी और 108 प्राइवेट अस्पतालों में आरक्षित की गई बेड की संख्या को कम कर दी गई है। सरकारी अस्पतालों में अब 4696 बेड की बजाय 2140 कोविड-19 डेडिकेटेड बेड होंगे।
देश में कोरोना के नए स्ट्रेन से संक्रमित मरीजों का आंकड़ा 25 पहुंच गया है। सभी ब्रिटेन से लौटे हैं। हेल्थ मिनिस्ट्री की ओर से जारी बयान में बताया गया है कि सभी को आइसोलेशन में रखा गया है।
5 राज्यों का हाल
1. दिल्ली
यहां गुरुवार को 574 लोग कोरोना संक्रमित पाए गए। 888 लोग रिकवर हुए और 13 की मौत हो गई। अब तक 6 लाख 25 हजार 369 लोग संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं। इनमें 6 लाख 9 हजार 322 लोग ठीक हो चुके हैं। 10 हजार 536 मरीजों की मौत हो चुकी है। 5 हजार 511 मरीज ऐसे हैं जिनका इलाज चल रहा है।
2. मध्यप्रदेश
यहां पिछले 24 घंटे में 844 नए संक्रमितों की पहचान हुई। 866 मरीज ठीक हुए और 11 की मौत हो गई। यहां अब तक कोरोना संक्रमण के 2.41 लाख केस आ चुके हैं। इनमें से 2.28 लाख मरीज ठीक हो चुके हैं और 3606 की मौत हो चुकी है। अब 9354 संक्रमितों का इलाज चल रहा है।
3. गुजरात
यहां गुरुवार को 780 लोग कोरोना संक्रमित पाए गए। 916 लोग रिकवर हुए और 4 की मौत हो गई। अब तक 2 लाख 45 हजार 38 लोग संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं। इनमें 2 लाख 30 हजार 993 लोग ठीक हो चुके हैं, जबकि 4306 मरीजों की मौत हो चुकी है। 9739 मरीज ऐसे हैं जिनका इलाज चल रहा है।
4. राजस्थान
यहां पिछले 24 घंटे में 698 लोग कोरोना संक्रमित पाए गए। 957 लोग ठीक हुए और 7 की मौत हो गई। अब तक 3 लाख 8 हजार 243 लोग संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं। इनमें 2 लाख 95 हजार 987 लोग ठीक हो चुके हैं, जबकि 2696 मरीजों की मौत हो चुकी है। अभी 9560 मरीज ऐसे हैं जिनका इलाज चल रहा है।
5. महाराष्ट्र
यहां गुरुवार को 3509 नए केस मिले। 3612 लोग ठीक हुए और 58 की मौत हो गई। अब तक 19 लाख 32 हजार 112 लोग संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं। इनमें 18 लाख 28 हजार 546 लोग ठीक हो चुके हैं, जबकि 49 हजार 521 मरीजों की मौत हो चुकी है। 52 हजार 902 मरीज ऐसे हैं जिनका इलाज चल रहा है।
उम्मीद। इसका सबसे बड़ा उदाहरण है ‘के-2’ को सख्त सर्दी में फतह करने की हमारी जिद। हर साल सर्दियों में इसे फतह करने पर्वतारोही निकल पड़ते हैं। भले ही आज तक कोई सफल न हो पाया हो। इस बार सेवन समिट ट्रैकिंग का 55 सदस्यीय दल दुनिया की दूसरी सबसे ऊंची (8,611 मीटर) चोटी को जीतने निकला है।
इस एक्सपीडिशन का नाम है- मिशन इम्पॉसिबिल। इस मिशन दल के मुखिया छांग दावा शेरपा ने गिलगित बाल्टिस्तान से फोन पर बताया- ‘दुनिया में 8 हजार मीटर से अधिक ऊंचे 14 पर्वत शिखर हैं। माउंट एवरेस्ट सहित 13 पर्वत ऐसे हैं, जहां सर्दियों में भी पर्वतारोही चढ़ाई में सफल हुए हैं। लेकिन के-2 अभी तक अजेय है।
हम यात्रा शुरू कर चुके हैं। उम्मीद है फरवरी के तीसरे हफ्ते तक अपने मिशन को पूरा कर चुके होंगे। हमारे दल में 28 नेपाली शेरपाओं के अलावा 27 विदेशी (अमेरिका, इंग्लैंड, नीदरलैंड्स, बुल्गारिया, स्पेन, स्विट्जरलैंड, फिनलैंड और ग्रीस) पर्वतारोही हैं।’ सफर की चुनौतियों के बारे में छांग बताते हैं- ‘पर्वत शिखर चीन-पाक सीमा पर काराकोरम पर्वत श्रृंखला में है।
चोटी पर 6000 मीटर तक चट्टानें और फिर बर्फ हैं। तापमान भी -25 से -45 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है। पर्वत हमारे लिए नया नहीं है, लेकिन के-2 अलग ही रोमांच है। यहां कैंप-2 से ही खतरा शुरू हो जाता है, जो बॉटलनेक तक बढ़ता जाता है। पर्वतारोहियों के दिमाग में फिसल जाने का डर हमेशा बना रहता है। यहां सफल होने की संभावना सदा ही 30% से कम ही रहती है, भले ही पहले से कितनी ही तैयारियां क्यों न कर ली गई हों।
सेवन समिट की एक टीम कैंप 2 यानी 6750 मीटर की ऊंचाई पर पहुंच चुकी है।
दावा: दल फतह नहीं कर पाया तो आगे संभव नहीं
8 हजार मीटर से अधिक ऊंचाई वाले सभी शिखर पर विजय पाने वाले सेवन समिट ट्रैक के चेयरमैन मिंगमा शेरपा कहते हैं- ‘के-2 को फतह करने की संभावना हमेशा से कम ही रही है। यदि यह दल शिखर पर नहीं पहुंच सका तो फिर कोई नहीं पहुंच पाएगा।’ 1953 में अमेरिकी पर्वतारोही जॉर्ज बेल ने कहा था- ‘के-2 बर्बर पहाड़ है, ये आपको मारने की कोशिश करता है। दुनिया के पांच सबसे ऊंचे पर्वत शिखरों में से के-2 सबसे खतरनाक है। शिखर पर पहुंचने वाले हर चार में से एक पर्वतारोही यहां अपनी जान गंवा बैठता है।’
के-2 सबसे बर्बर पहाड़; चार में से एक पर्वतारोही गंवा देता है अपनी जान
8611 मीटर ऊंची चोटी में 6 हजार मीटर तक चट्टानें और फिर बर्फ; यहां का तापमान भी -25 से -45 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है।
55 सदस्यीय दल दुनिया की दूसरी सबसे ऊंची चोटी के-2 को फतह करने निकला है; इनमें 28 नेपाली शेरपा और 27 विदेशी पर्वतारोही हैं।
14 पर्वत हैं दुनिया में जो 8 हजार मीटर से ज्यादा ऊंचे हैं; माउंट एवरेस्ट सहित 13 पर्वत ऐसे हैं, जहां सर्दियों में भी पर्वतारोही चढ़ाई में सफल हो चुके हैं।
21 लाख रुपए कम से कम खर्च आता है एक पर्वतारोही का; जबकि पाकिस्तान सरकार पर्वत फतह करने वालों को काफी रियायत भी देती है।
चुनौती: 3.5 किमी खड़ी ऊंचाई; 2 माह रहना होगा
सेवन समिट नेे दो टीमें बनाई हैं, जो बारी-बारी बेस कैंप से शिखर की ओर बढ़ेंगी। टीम ब्लैक पिरामिड के पास कैंप-3 बनाएगी और कैंप-4 की ओर बढ़ जाएगी। अधिकांश हादसे कैंप-3 पर होते हैं और चढ़ाई यहीं समाप्त हो जाती है।
बेस कैंप से ही खड़ी ऊंचाई 3.5 किमी है। चिमनी हाउस पर कैंप-2, फिर ब्लैक पिरामिड से आगे कैंप-3 और के-2 पर्वत के शोल्डर (8000 मीटर) से 50 मीटर नीचे कैंप-4 (7950 मीटर) है।
टीमें बॉटलनेक (8210 मी.) होते हुए एब्रूजी से जाती हैं, लौटते हुए कैंप-3 व कैंप-4 आती हैं। यहां सबसे खतरनाक बोटलनेक है। पर्वतारोहियों को दो महीने सबसे दुर्गम ग्लेशियर में रहना होगा।
रणनीति: हर दिन 2-3 घंटे ही चढ़ाई कर पाते हैं पर्वतारोही
पर्वतारोहण की चुनौतियां बेस कैंप पहुंचने के पहले ही शुरू हो जाती है। इस्लामाबाद से बेस कैंप पहुंचने में ही 8 दिन लग जाते हैं। रास्ते में कहीं होटल नहीं है। पर्वतारोहियों को अपना सारा सामान खुद लेकर चलना होता है। कदम-कदम पर हिमस्खलन का खतरा बना रहता है।
तूफानी हवाएं चलती हैं। हर दिन महज दो से तीन घंटे ही चढ़ाई हो पाती है। बाकी समय या तो हिमस्खलन रहता है या बर्फीला तूफान आया रहता है। छांग बताते हैं कि पाकिस्तान सरकार से कई रियायतें मिलने के बावजूद एक पर्वतारोही के अपने खानपान, सामान आदि पर करीब 21 लाख रु. खर्च करने होते हैं।
गुजरात के डॉक्टरों ने 79 वर्षीय मरीज के सिर (स्कल) का दुर्लभ ऑपरेशन किया है। मरीज नवीनचंद्र के सिर में अल्सर था। इस कारण त्वचा और हड्डी सड़ने लगी थी। डॉक्टरों ने ऑपरेशन कर उसे निकाला और प्लास्टिक सर्जरी कर नई त्वचा लगाई। ताकि मस्तिष्क का जो हिस्सा खुल गया है, उसे आवरण दिया जा सके। दरअसल, नवीनचंद्र पिछले 6 महीने से लगातार सिर दर्द से परेशान थे।
मेडिकल जांच में पता चला कि उन्हें ‘बेसल सेल कार्सिनोमा’ है। जब उन्हें इस बीमारी का पता चला, तब इस अल्सर का आकार अंगुली के अग्रभाग जितना यानी करीब दो सेमी था। यह 6 महीने में बढ़कर सिर के हड्डी तक पहुंच गया। संक्रमण फैलने के कारण मस्तिष्क के अंदर का भाग भी खुलने लगा था। तब अहमदाबाद के जीसीएस हॉस्पिटल के न्यूरोसर्जन डॉ. कुशल शाह और प्लास्टिक-कॉस्मेटिक रिकंसट्रक्टिव सर्जन डॉ. प्रमोद मेनन ने उनके उपचार की जिम्मेदारी अपने हाथ में ली।
उन्होंने बताया कि सिर की संक्रमित, खराब हुई चमड़ी को गांठ सहित निकालने के बाद मस्तिष्क को आवरण देने वाले ‘ड्यूरल कवरिंग’ की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए संक्रमित हड्डी को बाहर निकाला गया। बाद में प्लास्टिक सर्जरी कर नई त्वचा बनाकर लगाई। ऑपरेशन के तीन महीने बाद मरीज पूरी तरह स्वस्थ हैं।
from Dainik Bhaskar /national/news/the-skin-and-bone-of-the-head-had-started-to-rot-from-the-ulcer-it-was-operated-upon-and-made-a-new-skin-128075111.html
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किसान आंदोलन में शामिल लोगों की रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने के लिए टिकरी और सिंघु बॉर्डर पर किसान मॉल खोले गए हैं। अंतरराष्ट्रीय एनजीओ खालसा एड इन मॉल को ऑपरेट कर रहा है। यहां से किसानों को मुफ्त में टूथ ब्रश, टूथपेस्ट, साबुन, कंघी, चप्पल, तेल, शैंपू, अंडर गारमेंट्स, हीटिंग पैड, गारबेज बॉक्स जैसे सामान मिल रहे हैं। बड़े जत्थों के लिए गीजर और वॉशिंग मशीन जैसे सामान भी मुफ्त में उपलब्ध हैं। खालसा एड के लोग बताते हैं कि इस मॉल के संचालन के लिए उन्हें पूरे देश से आर्थिक मदद मिल रही है।
मॉल में सामान लेने के लिए लोगों की भीड़ न लग जाए इसलिए टोकन सिस्टम लागू किया गया है। मॉल संचालकों की ओर से धरनास्थल पर घूम-घूम कर किसानों को टोकन दे दिए जाते हैं। वे इस टोकन को मॉल में लाकर मुफ्त में सामान हासिल कर सकते हैं। वॉलेंटियर कुलवीर सिंह ने कहा, ‘टिकरी बॉर्डर पर जब मॉल शुरू हुआ तो काफी अफरातफरी मच गई थी। लोगों की लंबी कतार लग गई। इसलिए हमने यहां टोकन सिस्टम चालू किया है।
आमतौर पर हर रात 600 से 700 टोकन बांटे जाते हैं। अगले दिन किसान को मॉल के एंट्री प्वाइंट पर टोकन दिखाना होता है। इसके बाद उन्हें एक स्लिप मिलती है। इसमें वे अपना नाम, मोबाइल नंबर, आधार नंबर दर्ज कराते हैं और फिर सामानों पर टिक लगाते हैं जिनकी उन्हें जरूरत है। यह प्रक्रिया पूरी होने पर उन्हें प्रवेश मिलता है।’
तंबू में रहने वाले किसानों को मॉल के सामान के लिए मिलते हैं टोकन
इस मॉल से सामान पाने वाले किसान बताते हैं कि उन्हें लाइन में खड़े होने में भी कोई दिक्कत नहीं है। यह आखिरकार किसानों की भलाई और उनकी जरूरतों को पूरा करने के लिए खोला गया है। हालांकि, कुछ किसान यह भी बताते हैं कि उन्हें टोकन नहीं मिल रहे। उनका कहना है कि जो किसान धरना स्थल पर पीछे की ओर मौजूद हैं, उन तक अभी टोकन नहीं पहुंच रहा है।
from Dainik Bhaskar /local/punjab/news/to-meet-the-needs-of-agitating-farmers-kisan-mall-opens-on-singhu-border-all-goods-free-here-128075106.html
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